CENTRAL IDEA OF THE POEM Character of a Happy Life by Sir Henry Wotton

Bachground of the Poem : कविता 'Character of a Happy Life' सही अर्थ में प्रसन्न व्यक्ति के जीवन को परिभाषित करती है।  कवि Wotton के अनुसार वास्तव में प्रसन्न  व्यक्ति वह है जो आत्मनिर्भर, ईमानदार और सच्चा हो। उसका अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण हो, मृत्यु से ना डरता हो। अफवाहों की चिंता न करता हो और अपनी आत्मा की आवाज का पालन करता हो।  वह भगवान में विश्वास रखता हो। अच्छे मित्र या अच्छी पुस्तक की संगति में अपना समय व्यतीत करता हो। उसके पास भले ही भौतिक संपदा ना हो फिर भी उसके पास सब कुछ है।

CENTRAL IDEA OF THE POEM


In the poem 'Character of a Happy Life' by Sir Henry Wotton, we learn that worldly possessions and worldly success are not necessary for a happy life. If a man wants to lead a happy life, he should avoid all temptations and fears. He should be pious and should have self-respect and self-possession. Common vices such as jealousy and flattery should not touch him.

हिन्दी अनुवाद - सर हेनरी वॉटन द्वारा रचित 'Character of a Happy Life' से हमें ज्ञान मिलता है कि सांसारिक वस्तुएं एवं सफलताएँ, आनंदमय जीवन के लिए आवश्यक नहीं है। यदि कोई मनुष्य सुखी जीवन व्यतीत करना चाहता है, तो उसे समस्त लालच एवं भय से मुक्त रहना चाहिए। उसे शुद्ध रहना चाहिए तथा स्वयं पर अधिकार रखना चाहिए एवं स्वाभिमानी होना चाहिए। इर्ष्या एवं झूठी प्रशंसा जैसी साधारण बुराइयों से उसे दूर रहना चाहिए।


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