How Holi is celebrated in many states? What is Holi called in different states? Why is Holi celebrated? | Know in hindi होली क्यों मनाये जाते हैं ? || होली के प्रकार || होली का महत्व ||

अनेक राज्यों में होली कैसे मनाए जाते हैं ? || अलग अलग राज्यों में  होली को क्या कहते हैं? || होली क्यों मनाये जाते हैं ? || जाने हिंदी में || होली के प्रकार || होली का महत्व ||

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'आज न छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली' इसी तरह के सतरंगी गीत-संगीत की बौछार के साथ होली का त्योहार भारत के कई राज्यों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। हमारा यह
होली स्पेशल पोस्ट आपको देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले होली के अलग-अलग तरीके से रुबरु करवायेगा।

अगर आप भी होली  को अपनी ज़िन्दगी की खूबसूरत यादों में शुमार करना चाहते हैं तो देर मत कीजिये हमारे इस ब्लॉग में जानिये कि देश में कहाँ और कैसे मनाया जाता है होली का पर्व और अपने पार्टनर व फैमिली के साथ होली के रंगों में रंगने के लिए बस निकल पड़िये।


लट्ठमार होली - उत्तर प्रदेश

सर्वाधिक लोकप्रिय होलियों में से एक है मथुरा की लट्ठमार होली। यह होली मथुरा के बरसाने में खेली जाती है जिसमें महिलाएं इस दिन पुरुषों को लाठियों से मारती हैं। बरसाना भगवान कृष्ण की प्रेमिका राधा की जन्मस्थली है।


मान्यता है कि कृष्ण जी अपने सखाओं के साथ कमर में फेंटा लगाए राधारानी तथा उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे और उनके साथ ठिठोली करते थे जिस पर राधारानी और उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढालों का प्रयोग करते थे। यहीं परंपरा आज तक चली आ रही है। इस साल होली कार्यक्रम लड्डू होली के साथ 3 मार्च से शुरू होगा। 4 मार्च को बरसाना में लट्ठमार होली का आयोजन किया जाएगा। वहीं, अगले दिन यानि 5 मार्च को दशमी के दिन नन्दगांव में लट्ठमार होली खेली जायेगी।

धुलंडी होली - हरियाणा

हरियाणा में होली को धुलंडी के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार यूं तो हर किसी के लिए खास होता है लेकिन भाभी और देवर के लिए कुछ ज्यादा ही मनोरंजक होता है। इस दिन भाभी देवर की मजाकिया अंदाज में जमकर धुनाई करती है।

यहां होली (धुलंडी) के दौरान भाभी-देवर के रिश्ते की मिठास की अनोखी मिसाल दिखती है। जब भाभियां अपने प्यारे देवरों को पीटती हैं और उनके देवर सारे दिन उन पर रंग डालने की फिराक में होते हैं। भाभियों का यह प्यारा सा बदला इस क्षेत्र में होली को 'धुलंडी होली' का नाम देता है।

फूलों की होली - उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली सिर्फ 15-20 मिनट तक चलती है जो कि आपको मदहोश करने के लिए काफी है। इस बार ख़ास बात यह है कि, मथुरा में चढ़ावे के फूलों से होली खेली जाएगी इस होली में बांके बिहारी मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारी भक्तों पर फूलों की वर्षा करते हैं।


होली में ब्रज की होली की छटा ही अलग है। जहां देश के दूसरे हिस्सों में रंगों से होली खेली जाती है वहीं सिर्फ मथुरा एक ऐसी जगह है जहां रंगों के अलावा फूलों से भी होली खेलने का रिवाज है। श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की होली को देखने देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानियों की भीड़ उमड़ती है। वैसे तो, ज्यादातर जगहों पर होली 1 दिन खेली जाती है जबकि मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, बरसाने में कुल एक हफ्ते तक होली चलती है और हर दिन की होली अलग तरह की होती है।

फगुआ - बिहार

सबसे पहले आपको फगुआ का मतलब साफ़ कर दूँ, यहाँ फगुआ का मतलब फागुन के त्यौहार होली से है। बिहार में इसकी शुरुआत वसंत पंचमी से ही हो जाती है। वैसे तो होली आने के पहले से ही हर किसी का मन होलियाने लगता है, लेकिन बिहार की होली की बात ही जुदा है।


होली के त्यौहार को मनाने की शुरुआत बिहार के पूर्णिया से ही हुई थी। कहा जाता है कि, होलिका इसी स्थान पर भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर जलती चिता पर बैठ गयी थी। इसलिए, यहां होली के एक दिन पहले वाली शाम को होलिका दहन भी मनाया जाता है। और, फिर अगले दिन होली की शुरुआत कुल देवी-देवताओं को रंग लगाकर और पुए का भोग लगाकर काफी मस्ती भरा होता है।

रंग पंचमी - महाराष्ट्र


महाराष्ट्र में होली का उत्सव अपने आप में खास महत्व रखता है। यहां रंगों के इस पर्व को आमतौर पर 'रंग पंचमी' के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है।


कहा जाता है कि, भगवान कृष्ण बचपन में पड़ोसी के घर से माखन चोरी करते थे। उनके डर से पड़ोस के लोगों ने अपने घर में ऊंचाई पर माखन रखने लगे ताकि श्री कृष्ण चुरा ना सके। यही परंपरा आज तक चली आ रही है। भगवान कृष्ण को याद करने के लिए हर साल भव्य पंडाल में मटका फोड़ने का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसमें नौजवान लड़कों द्वारा पिरामिड बनाया जाता है फिर एक प्रशिक्षित लड़का मटका फोड़ने के लिए चढ़ते हैं और महिलाएं उनपर रंग और पानी के छींटे डालकर उन्हें मटका फोड़ने से रोकती है। यह शानदार नज़ारा आपको श्री कृष्ण के उन दिनों की याद दिलाएगा।

रॉयल होली - जयपुर



गुलाबी शहर के सिटी पैलेस में रॉयल होली की खुमारी कुछ अलग ही रंग में दिखती है। होली की मस्ती यहां देखते ही बनती है। होली मनाने का यहां रॉयल एक्सपीरियंस मिलता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान भी यहां आते हैं और जमकर होली खेलते है।

इस त्यौहार पर पूर्व राजपरिवार के लोगों के साथ ही आम लोग भी शामिल होते हैं। इनमें हर उम्र व हर तबके के लोग शामिल होते हैं। वह एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली के त्यौहार की बधाई देते हैं। होली के उत्सव के दौरान सिटी पैलेस में रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इस दौरान, यहां राजस्थानी संस्कृति साकार हो जाती है। यहां आने वाले सैलानियों के लिए यहां की होली जीवनभर के लिए यादगार हो जाती है।

बसंत उत्सव - पश्चिम बंगाल


देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में होली को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन वहां पर इसे बसंत उत्सव के नाम से जाना जाता है। इस दिन को श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्म दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। शांति निकेतन हर साल बसंत उत्सव के रूप में होली मनाता है। यह पश्चिम बंगाल का एक छोटा सा शहर है, जो बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की वजह से जाना जाता है।

बंगाल में होली का स्वरूप पूर्णतया धार्मिक होता है। होली के एक दिन पूर्व यहां दोल जात्रा निकाली जाती है। दोल जात्रा या दोल उत्सव बंगाल में होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ लाल किनारी वाली पारंपरिक सफेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं।

होला मोहल्ला - पंजाब



यहां होली का अंदाज जुदा है, इसे जांबाजों की होली कहते हैं। इसमें वीरता और पौरुष का चटख रंग मिला होता है। जो रग-रग में उत्साह भर देता है। जांबाजी और श्रद्धा का ऐसा रंग जो तन-मन को सराबोर कर दे। सिखों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनंदपुर साहिब मे होली पर लगने वाले मेले को होला महल्ला कहते हैं।

इस अवसर पर, भांग की तरंग में मस्त हो घोड़ों पर सवार जांबाज (निहंग), हाथ में निशान साहब उठाए और तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का हैरत अंगेज प्रदर्शन करते हैं। पंज पियारे जुलूस का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और जुलूस में निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखते हुए बोले सो निहाल... के नारे बुलंद करते हैं। सिखों के दसवें गुरुगोबिंद सिंह जी ने होली उत्सव को होला महल्ला नाम दिया था। वह इसके माध्यम से समाज के दुर्बल और शोषित वर्ग को मुख्यधारा में लाना चाहते थे। यहां की होली का अनुभव करना आपके लिए एक अलग ही अनुभव देगा।

कमान पंडिगई - तमिलनाडु



तमिलनाडु में लोग होली को कामदेव के बलिदान के रूप में याद करते हुए मनाते हैं। यहां पर होली को तीन अन्य नामों कमान पंडिगई, कामाविलास और कामा-दाहानाम के नाम से भी जानते हैं। यहां पर्यटकों के लिए काफी कुछ खास और बेहतरीन है। आज भी तमिलनाडु की संस्‍कृति और सभ्‍यता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है, इसलिए पर्यटक भारी संख्‍या में यहां आते है।

सामान्य रंग के परंपरा के विपरीत यहां के लोग विश्वास के साथ कामदेव को चंदन चढ़ाते हैं। ऐसे गीत गाए जाते हैं जो भगवान शिव के क्रोध के कारण राख में जल जाने पर रति, कामदेव की पत्नी के दुःख को दर्शाते हैं। यह माना जाता है कि प्रेम के देवता द्वारा जारी किए गए तीर से मारा जाने के बाद भगवान शिव देवी पार्वती से शादी करने के लिए सहमत हुए थे।

मंजुल कुली - केरल


केरल में होने वाला ओणम फेस्टिवल दुनियाभर में प्रसिद्ध है लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि रंगों का त्योहार होली भी यहां उतनी ही धूम के साथ मनाया जाता है। जिन्हें रंगों से प्यार है उन सैलानियों के लिए केरल में होली मनाना यादगार अनुभव रहेगा। होली को यहां मंजुल कुली और उक्कुली के रूप में जाना जाता है।
यहां लोग पहले दिन गोसरीपुरम थिरुमा के कोंकणी मंदिर जाते हैं, पूर्ववर्ती दिन वे पानी और हल्दी के साथ होली खेलते हैं। रंगों का त्योहार पारंपरिक लोक गीत गाकर मनाया जाता है जो कि वास्तव में काफी सुंदर और शांत होता है। अगर आप शांत और शालीन तरीके से होली के रंग में रंगना चाहते हैं तो केरल की होली आपके लिए बेस्ट रहेगी।

शिमगो - गोवा


गोवा की होली खूबसूरत बीच की वजह से देश के अन्य हिस्सों की होली से अलग और आकर्षित करने वाली होती है। होली के त्यौहार पर देश के पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों भी जमकर मस्ती करते हुए रंग-बिरंगे-रंगों में रंगने का आनंद लेते हैं। यहां होली के त्यौहार पर रंग, संगीत, पूल पार्टी, डीजे पार्टी और डांस के साथ शानदार जश्न और पार्टियों का मजा ले सकते हैं।






योसंग - मणिपुर


एक वक्त था जब कहा जाता था कि होली सिर्फ उत्तर भारतीय क्षेत्रों का त्योहार है लेकिन युवाओं ने इस सोच को बदला। यही कारण है कि मणिपुर में छिट-पुट रूप में मनाई जानेवाली होली अब बड़े स्तर पर वहां के योसंग त्यौहार के साथ मनाई जाती है। योसंग त्योहार और होली का उत्सव यहां 5 दिनों तक चलता है।
सूरज ढलने के बाद लोग होलिका जलाने के लिए इकट्ठा होते हैं और वहां गांव के बच्चे पड़ोस में जाकर चंदा इकट्ठा करते हैं। दूसरे और तीसरे दिन, स्थानीय बैंड मंदिरों में अपना प्रदर्शन करते हैं जबकि लड़कियां दान मांगती हैं। बाकी के दो दिन वहां के लोग रंगों और पानी से होली खेलते हैं। इस दौरान खाने-पीने के पारंपरिक स्वाद का जायका आप ले सकते हैं। इस बात में तो कोई संदेह है ही नहीं कि मणिपुर प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज है और इस त्योहार के रंगों में इसकी भव्यता कहीं अधिक बढ़ जाती है। भले ही मणिपुर की होली बहुत प्रसिद्ध न हो लेकिन यहां होली होती बहुत मजेदार है।

वैसे तो, भारत विविधताओं से भरा देश है जहां साल भर किसी न किसी धर्म का कोई न कोई त्योहार चलता ही रहता है, लेकिन इन सभी त्योहारों में होली सबसे अलग है। रंगों के त्योहार 'होली' जैसी मस्ती शायद ही आपको किसी अन्य त्योहार में देखने को मिलेगा। जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। विविधताओं से भरे इस देश में खेली जाने वाली अलग-अलग तरह की होली को आप भी अपने शानदार अनुभव में करें।
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