Computer Hardware Hindi Notes for CCC (Course on Computer Concepts) कंप्यूटर हार्डवेयर हिंदी नोट्स सीसीसी कोर्स के लिए


परिचय


वह उपकरण जो सूचना तैयार करने के लिए डेटा को प्रोसेस करता है, हार्डवेयर कहलाता है। माइक्रोकंप्यूटर सिस्टम के लिए हार्डवेयर में विभिन्न प्रकार के उपकरण होते हैं। इनको चार मूल श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है- इनपुट आउटपुट प्रोसेसिंग, स्टोरेज एवं कम्यूनिकेशन।


हार्डवेअर के प्रकार



जबकि इनपुट डिवाइस हमारे द्वारा समझे जाने वाले निर्देशों को सिस्टम यूनिट के द्वारा प्रोसेस करने योग्य बनाता है, उसी प्रकार आउटपुट डिवाइस सिस्टम यूनिट द्वारा ऐसे रूप मंो प्रोसेस किए गए डेटा को हमारे द्वारा समझने योग्य भाषा में परिवर्तित करता है। आउटपुट डिवाइस मशीनी भाषा को लेटर, संख्या, ध्वनि एवं चित्र में अनुवाद करता है जिनको यूज़र समझ सकता है




इनपुट



इनपुट क्या है? इनपुट कोई डेटा या निर्देश हैं जिनका कंप्यूटर द्वारा उपयोग किया जाता है। यह विभिन्न स्त्रोतों से आ सकता है। उदाहरण के लिए, जब आप वर्ड प्रोसेसर का उपयोग करते हैं, तो आप अक्षरों एवं संख्याओं के रूप में डेटा एंटर करते है तथा डॉक्यूमेंट को सेव एवं प्रिंट करने के लिए जैसे कार्यों के लिए कई निर्देशों का उपयोग करते हैं। आप विषयों को प्वॉइंट करके या अपनी आवाज़ का उपयोग करके भी डेटा को एंटर कर सकते हैं। इनपुट के अन्य स्त्रोतों में स्कैन की गई या खींची गई तस्वीरें भी शामिल हैं।
इनपुट डिवाइस स- इनपुट डिवाइस डेटा और प्रोग्राम का अनुवाद करती है जो यूज़र द्वारा समझने योग्य भाषा का ऐसे रूप में अनुवाद करती है जिसे कंप्यूटर प्रोसेस कर सके। सर्वाधिक लोकप्रिय इनपुट डिवाइस कीबोर्ड एवं माउस हैं। आइए, हम कुछ इनपुट डिवाइसों पर नज़र डालें।


कीबोर्ड





यह किसी सामान्य टाइपराइटर की तरह होता है। इसमें विभिन्न प्रकार के बटन होते हैं, जो विभिन्न तरह के कार्य करता है। यूज़र कीबोर्ड का उपयोग करके डेटा एवं निर्देशों को टाइप कर सकता है। 














माउस




यह एक लघु आकार यंत्र होता है, जो "प्रमुख संचालन इकाई" (मेन प्रौसेसिंग यूनिट) से संलग्न होता है। इसके संचालन से कंप्यूटर के स्क्रीन पर एक बिन्दु के माध्यम से सम्पर्क स्थापित होने पर कंप्यूटर संचालित होता है। इसके सामान्यतः तीन बटन होते है जिनका हम स्क्रीन से चयन कर सकते हैं।









जॉयस्टिक



यह नोकिले मुखवाली खड़ी छड़ जैसी होती है, जो नीचे की ओर विद्यमान रहती है। यह मुख्यतया कंप्यूटर गेम्स और अस्पतालों मे अल्ट्रासाउंड स्कैनरों में प्रयुक्त होती है।












स्कैनर



इस डिवाइस का उपयोग सूचना जैसे फोटोग्राफ एवं पेपर पर डाक्यूमेंट को केप्चर करने तथा कंप्यूटर इमेज में अनुवाद करने के लिए किया जाता है। स्कैनिग डिवाइस तीन प्रकार के है- ऑप्टिकल स्कैनर, बार कोड रीडर्स एवं केरेक्टर एवं मार्क रिकगनिशन डिवाइस। 







ऑप्टिकल स्कैनर्स



ये स्कैनर टेक्स्ट एवं चित्र वाले डॉक्यूमेंट को ग्रहण करते हैं तथा उनको मशीन द्वारा पढ़ने योग्य रूप में परिवर्तित करते हैं। ये अकेले अक्षरों एवं चित्रों को नहीं पहचानते। ऑप्टिकल स्कैनर के दो मूल प्रकार हैं। “फ़्लैटबेड स्कैनर” कॉपी मशीन की तरह होते हैं। स्कैन किए जाने वाले चित्र ग्लास की सतह पर रखे जाते है, जिसे नीचे से रिकॉर्ड किया जाता है। 


“पोर्टेबल स्कैनर” हेंडहेल्ड उपकरण होता है, जिसका स्लाइड चित्र के बाहर होता है, और जो सीधा संपर्क बनाता है।



कार्ड रीडर्स



आज क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड तथा अन्य प्रकार के पहचान कार्डों का उपयोग सामान्य हो गया है। इन कार्डों पर यूज़र के नाम एवं अन्य सूचनाएँ छपी होती हैं। इस तरह से कार्ड पर कुछ इनकोडेड सूचनाएँ संग्रहीत होती हैं। “कार्ड रीडर्स” का उपयोग इन इनकोड की हुई सूचनाओं को पढ़ने के लिए किया जाता है। कार्ड रीडर्स मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।

मैगनेटिक और रेडियो फ़्रिक्वेंसी कार्ड रीडर "मैगनेटिक कार्ड रीडर" सबसे अधिक प्रचलित हैं। जब कार्ड को मैगनेटिक कार्ड रीडर से गुज़ारा जाता है तो यह कार्ड के पीछे पतली मैगनेटिक स्ट्रिप पर कोड की हुई सूचना को पढ़ता है।

"रेडियो फ़्रिक्वेंसी कार्ड रीडर" में कार्ड को संपर्क कराने की आवश्यकता नहीं होती। कार्ड में एक छोटी आरएफआईडी (रेडियो फ़्रिक्वेंसी आईडेंटिफ़िकेशन) चिप होती है, जिसमें कोड की हुई सूचना होती है। कार्ड को कार्ड रीडर से कुछ इंच दूरी से गुज़ारने पर भी वह सूचना को पढ़ लेता है।


बार कोड रीडर्स



बार कोड उत्पाद कंटेनर पर प्रिंट किये हुए वर्टिकल ज़ेबरा-स्ट्रिप मार्क होते हैं। “बार कोड रीडर” एक इनपुट डिवाइस है, जो बार कोड को पढ़ती है एवं कंप्यूटर में सूचना को भेजती है। लगभग सभी सुपर मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक कैश रजिस्टर एवं बार कोड सिस्टम का उपयोग होता है जिसे “यूनिवर्सल प्रोडक्ट कोड (यूपीसी)” कहा जाता है। बार कोड रीडर उत्पाद के यूपीसी कोड को स्कैन करते हैं और सुपरमार्केट के कंप्यूटर में भेजता है जहाँ पर वर्णन, कीमत एवं उत्पाद के स्तर का विवरण सहित सूची रहती है। तदनुसार, बिल पूरा किया जाता है एवं स्टॉक को अपडेट किया जाता है। 


कैरेक्टर एवं मार्क रिकगनिशन डिवाइस

ये डिवाइस एक प्रकार की स्कैनर होती है जो विशेष कैरेक्टर एवं चिन्हों की पहचान करने तथा उनको इलेक्ट्रॉनिक डेटा में परिवर्तित करने में सक्षम होता है। कैरेक्टर एवं मार्क रिकगनिशन के तीन प्रकार निम्न हैं


मैग्नेटिक-इंक कैरेक्टर रिकगनिशन (एमआईसीआर)-

इसका उपयोग बैंक में चैक एवं डिपॉज़िट स्लिप के नीचे दी गई संख्या को पढ़ने के लिए किया जाता है।














ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकगनिशन और ऑप्टिकल-मार्क रिकगनिशन

यह विशेष पूर्वप्रिंट कैरेक्टरों का उपयोग करता है जिसे प्रकाश स्त्रोत द्वारा पढ़ा जाता है एवं इसे मशीन द्वारा पढ़ने योग्य कोड में परिवर्तीत करता है। ओसीआर डिवाइस का उपयोग विभागीय स्टोर में रिटेल कीमत टैग को पढ़ने के लिए किया जाता है।


ऑप्टिकल-मार्क रिकगनिशन (ओएमआर)-




यह पेंसिल जैसे चिन्हों की मौजूदगी या ग़ैर- मौजूदगी को पहचानता है। ओएमआर का उपयोग प्रायः बहुविकल्पीय जांच की गणना के लिए होता है। 








कैमरा 

इमेज कैप्चरिंग उपकरण चित्र की डिजिटल प्रति बनाने वाले (ऑप्टिकल स्कैनर) किसी मूल के विपरित इमेज कैप्चरिंग उपकरण मूल चित्रों को बनाते अथवा कैप्चर करते हैं। इन उपकरणों में डिजिटल कैमरे और डिजिटल वीडियो कैमरे शामिल हैं।

डिडिजिटल कैमरे" और पारंपरिक कैमरों में केवल एक ही भिन्नता है कि डिजिटल कैमरों में चित्र किसी फिल्म में रिकॉर्ड न हो कर एक डिस्क या कैमरे की मेमोरी में डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होते हैं। डिजिटल तस्वीरों को आपके कंप्यूटर में डाउनलोड या ट्रांसफर भी किया जा सकता है। आप तस्वीरों को खीचकर उसे तुरंत देख भी सकते हैं।


वेब कैम / डिजिटल वीडियो कैमरा



डिजिटल वीडियो कैमरे" गतिशील चित्रों को डिजिटल रूप से डिस्क या कैमरे की मेमौरी में रिकॉर्ड करता है। अधिकतर वीडियो कमरों में स्थिर चित्र लेने की भी क्षमता होती है। "वेबकैम" विशेष प्रकार के वीडियो कैमरे होते हैं जो चित्रों को कैप्चर कर उन्हें इंटरनेट पर भेजने के लिए कंप्यूटर पर भेजता है।


ऑडियो-इनपुट उपकरण



ये उपकरण ध्वनि को वैसे रूप में परिवर्त्तित करते हैं जिसे सिस्टम यूनिट प्रोसेस कर सके। ऑडियो-इनपुट कई प्रकार के होते हैं, जैसे मानवीय आवाज एवं संगीत। "माइक्रोफ़ोन" सबसे अधिक उपयोग होने वाला ऑडियो-इनपुट उपकरण है।


हैडफ़ोन 




इसके द्वारा हम बोलकर आँकड़ों और आदेशो-निर्देशों को कंप्यूटर में दर्ज़ कर सकते हैं। तथा साथ ही हम आउटपुट को सुन भी सकते है। 







आउटपुट डिवाइस (उपकरण)



आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर द्वारा उत्पन्न की गयी सूचना को मानव द्वारा समझे जाने वाले स्वरूप में बदलते हैं। अब हम कुछ आउटपुट उपकरणों को देखते हैं।


मॉनीटर –



इसे विज़ुअल डिस्प्ले यूनिट (वीडीयू) भी कहते हैं। इसमें एंटर किया गया डेटा और यूज़र के लिये प्रोसेस किया गया डेटा दोनों ही प्रदर्शित होते हैं। यह एक टीवी स्क्रीन के सामान होता है, और इसमें टेक्स्ट एवं ग्राफ़िक तस्वीरें नज़र आ सकती हैं। मार्केट में सामान्यतः तीन प्रकार के मॉनीटर उपलब्ध हैं। ये हैं, 

  1. सीआरटी मॉनीटर
  2. एलसीडी मॉनीटर
  3. एलईडी मॉनीटर।



सीआरटी मॉनीटर



कैथोड रे ट्यूब (सीआरटी) एक वैक्यूम ट्यूब होती है, जिसमें एक इलेक्ट्रॉन की गन होती है जो इलेक्ट्रॉन का स्रोत होती है, और साथ ही एक फ़्लोरेसेंट स्क्रीन होती है। स्क्रीन के पीछे की ओर एक इलेक्ट्रॉन की तरंग आगे-पीछे गति कराने से यह कार्य करती है। हर बार जब यह प्रकाश-तरंग स्क्रीन से गुज़रती है, यह ग्लास-ट्यूब के अंदर स्थित फॉस्फर की बिंदुओं को प्रकाशित करती हैं, और फलस्वरूप स्क्रीन का सक्रिय भाग प्रकाशित हो  उठता है। स्क्रीन पर ऊपर से नीचे की ओर ऐसी अनेक लाइनें बनाकर, यह स्क्रीन पर पूरी तस्वीरें बनाती हैं।


एलसीडी मॉनीटर 


लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (एलसीडी) एक पतला और समतल इलेक्ट्रॉनिक विज़ुअल डिस्प्ले है, जो लिक्विड क्रिस्टल की प्रकाश मॉड्यूलेटिंग प्रॉपर्टीज़ का उपयोग करता है। सामान्यतः, ये अधिक संक्षिप्त, कम वज़न वाले, पोर्टेबल, अधिक विश्वसनीय, और आँखों के लिये अधिक आसान होते हैं। एलसीडी में बिजली की कम खपत होती है, और ये सीआरटी की अपेक्षा अधिक सुरक्षित होते हैं। बिजली की कम खपत करने के कारण इसका उपयोग बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जा सकता है। एलसीडी डिस्प्ले का मुख्य लाभ यह है कि ये कम स्थान लेते हैं, और इनका वज़न कम होता है। 
एलसीडी मॉनीटर निम्नलिखित दो मूल प्रकार के होते हैं। “पैसिव मैट्रिक्स” या “डुअल-स्कैन मॉनीटर” में बहुत कम बिजली की आवश्यकता होती है लेकिन इसकी तस्वीरों में अधिक स्पष्टता नहीं होती। “एक्टिव-मैट्रिक्स” या “थिन फ़िल्म ट्रांज़िस्टर (टीएफ़टी) मॉनीटर” में अधिक स्पष्टता होती है, लेकिन ये अधिक मंहगे होते हैं, और इनको अधिक बिजली की आवश्यकता होती है।



एलईडी मॉनीटर






एलईडी मॉनीटर मूल रूप से नए प्रकार के एलसीडी हैं, क्योंकि इनमें भी स्क्रीन पर अभीष्ट तस्वीर बनाने के लिये बैकलाईट के रूप में लिक्विड क्रिस्टल्स का उपयोग होता है, जिसके लिये प्रकाश छोड़ने वाले डियोड (एलईडी) का उपयोग करते हैं, जिन्होंने स्टैंडर्ड कोल्ड कैथोड फ़्लोरेसेंट लैम्प का स्थान ले चुके हैं। इसमें एलसीडी की अपेक्षा कम बिजली की खपत होती है, और ये एलसीडी एवं प्लाज़्मा मॉनीटर से अधिक पतले होते हैं। एलईडी मॉनीटर पर्यावरण के अनुरूप भी होते हैं। एलईडी मॉनीटर में मॉनीटर संबंधी कोई भी धुंधलापन नहीं होता, जिससे ये देखने में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं उत्पन्न करते। दूसरी ओर, एलईडी मॉनीटर में रंगों की पुनर्उत्पादकता कमज़ोर होती हैं, जिससे स्क्रीन कुछ निर्जीव सी लगती है। वर्तमान में, एलईडी मॉनीटर मंहगे हैं, लेकिन एलईडी मॉनीटर की लोकप्रियता दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही है। लोग एलसीडी मॉनीटर से एलईडी मॉनीटर की ओर जा रहे हैं।


रिज़ोल्यूशन और डॉट (पिक्सेल) पिच

मॉनीटर की गुणवत्ता उसकी स्पष्टता से परखी जाती है। स्पष्टता, मॉनीटर के विभिन्न गुणों पर आधारित है जौ इस प्रकार है

1. रिज़ोल्यूशन- मॉनीटर के चित्र कई सारी बिन्दू या "पिक्सेल (चित्र तत्व)" से बने होते हैं। रिज़ोल्यूशन को पिक्सेल में व्यक्त किया जाता है। अधिक रिज़ोल्यूशन वाले मॉनीटर में पिक्सेल की संख्या काफी अधिक होती है और उसकी स्पष्टता बेहतर होती है।

2. डॉट (पिक्सेल) पिच- ये प्रत्येक पिक्सेल के बीच की दूरी होती है। कम डॉट पिच होने से स्पष्टता बेहतर होती है।
रिफ्रेश रेट और मॉनिटर का आकार:

3. रिफ्रेश रेट- यह दर्शाता है कि किस प्रकार मॉनिटर पर एक दिखाई गई इमेज को पुन: दिखाया जाता है। तेज रिफ्रेश रेट के परिणामस्परूप बेहतर क्वालिटी की इमेज दिखाई देती है।
4. मॉनिटर का आकार- यह मॉनिटर के चित्र दर्शाने वाले आयाताकार के दो विपरित कोनों के मध्य मे दूरी होती है। छोटे आकार के मॉनिटर में इमेज की गुणवत्ता बेहतर होती है।


विशेष प्रकार के मॉनिटर


कुछ विशेष प्रकार के मॉनिटर का विवरण नीचे दिया गया है
"ई-बुक्स"- हाथों में किये जाने वाले, पुस्तक के आकार की डिवाइसे हैं जो टेक्सट और ग्राफिक्स को दर्शाते हैं।
"डाटा प्रोजेक्टर्स"- ये स्लाइड प्रोजेक्टर्स के समान होते है जिन्हें माइक्रोकम्प्यूटर तथा प्रोजेक्ट कम्प्यूटर के आउटपुट से जोड़ा जाता है।
"हाई-डेफिनिशन टेलीविजन (HDTV) उच्च-पारिभाषित टेलीविजन"- यह डिजीटल आउटपुट देता है तथा ग्राफिक आटिस्टों, डिजाइनरों तथा प्रकाशकों के लिये उपयोगी हैं।

प्रिंटर चूँकि मॉनीटर पर नज़र आने वाले आउटपुट को भविष्य के सन्दर्भ के लिये स्टोर नहीं किया जा सकता, अतः आउटपुट की एक स्थायी प्रति लेने के लिये प्रिंटर का उपयोग होता है। निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर 

प्रिंटर विभिन्न प्रकार के होते हैं


रीज़ोल्यूशन : यह प्राप्त की गयी तस्वीर की स्पष्टता की माप है। प्रिंटर के रीज़ोल्यूशन को “डीपीआई (अर्थात, डॉट पर इंच) में मापा जता है। अधिक डीपीआई के फलस्वरूप बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीर प्राप्त होती है।

कलर कैपेबिलिटी, स्पीड और मेमोरी


  1. कलर कैपेबिलिटी (रंग क्षमता)-
  2. प्रिंटर में सिर्फ काली अथवा काली के साथ रंगीन लेने का विकल्प होता है। रंगीन प्रिंट लेना अपेक्षाकृत मेहंगा होता है।
  3. स्पीड(गति)- इसको प्रति मिनट प्रिंट होने वाले पृष्ठों की संख्या से नापा जाता है।
  4. मेमोरी (याददाश्त)- इनका उपयोग प्रिंट के लिये इतंजार किये जाने वाले निर्देशों तथा दस्तावेजों को संग्रहीत करने में किया जाता है।

इंक-जेट,लेजर और थर्मल प्रिंटर्सइंक-




  • जेट प्रिंटर्स- यह प्रिंटर अपेक्षाकृत सस्ते होते है। ये कागज की सतह पर तीव्र गति से स्याही को स्प्रे करते है।
  • लेजर प्रिंटर्स- इन प्रिंटरों की तकनीक फोटोकापी मशीनों के समान होती है। इनमें उत्कृष्ट गुणवत्ता की इमेज बनाने के लिये लेजर लाइट बीम का उपयोग किया जाता है ये इंक-जेट प्रिंटर की तुलना में ज्यादा मेंहगे होते हैं।
  • थर्मल प्रिंटर्स- ये प्रिंटर ऊष्मा के प्रति संवेदनशील कागज पर ऊष्मा का प्रयोग करके इमेज बनाते हैं। आरंभ में इनका उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में डाटा को रिकॉर्ड करने में किया जाता था, परन्तु अब इनका प्रयोग अति उच्च-स्तर के रंगीन कलात्मक कार्यों तथा टेकस्ट तैयार करने में भी किया जाता है


अन्य प्रिंटर




"डोट-मैट्रिक्स प्रिंटर्स"- ये प्रिंट हेड पर कई छोटो पिनों का प्रयोग करके शब्द और इमेज बनाते हैं। ये मेंहगें नही होते परन्तु शोर बहुत करते हैं। इनका उपयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ उच्च-गुणवत्ता के आउटपुट की आवश्यकता नही होती है। 






प्लॉटर्स (Plotters)- ये प्रिंटर विशेष उददे्श्य के लिये होते हैं जो ग्राफ़िक इनपुट डिवाइसों से आउटपुट का उपयोग का प्रयोग करते हैं तथा इनका उपयोग डिज़ाइनों, रेखाचित्रों तथा कलाचित्रों को प्रिंट करने में किया जाता है। 

फोटों प्रिंटर्स- ये प्रिंटर विशेष उददे्श्य के लिये होते हैं जो डिजिटल कैमरे से फोटो क्वालिटी की इमेज प्रिंट करते हैं।

पोर्टेबल प्रिंटर्स- ये छोटे आकार के और कम भार के प्रिंटर होते हैं जिन्हें नोटबुक कम्प्यूटर के साथ काम करने के लिये डिजाइन किया गया है।



ऑडियो-आउटपुट डिवाइस



ये डिवाइस कम्प्यूटर से ऑडियो सूचना को ध्वनि में परिवर्तित करते हैं ताकि लोग समझ सकें। "स्पीकर" और "हेडफोन" अधिक प्रयोग में आने वाले ऑडियो-आउटपुट डिवाइस हैं जिन्हें सिस्टम यूनिट में एक साउंड कार्ड (ध्वनि कार्ड) से जोड़ दिया जाता है तथा इनका उपयोग संगीत सुनने तथा कम्प्यूटर सिस्टम से प्रयोगकर्ता तक सूचना पहुँचाने में किया जाता है। 


डिजिटल म्यूज़िक प्लेयर



डिजिटल म्यूज़िक प्लेयर्स” ऑडियो फ़ाइलों को स्टोर, ट्रांसफ़र (स्थानांतरित) और चलाने के लिये विशिष्टता प्राप्त उपकरण हैं। आज, अधिकांश प्लेयर में वीडियो फ़ाइल चलाने की भी क्षमता होती है। कुछ लोकप्रिय ऑडियो एवं वीडियो प्लेयर हैं, एपल का आईपॉड, क्रिएटिव ज़ेन, माइक्रोसॉफ़्ट ज़्यून और आईरीवर।



इनपुट और आउटपुट उपकरणों का मिश्रण



अनेक उपकरणों में इनपुट और आउटपुट दोनों की क्षमताएँ एक साथ शामिल होती हैं। सामान्य मिश्रित उपकरणों में शामिल हैं, फ़ैक्स मशीन, बहुविध-क्रियाशील उपकरण, इंटरनेट टेलीफ़ोन, और टर्मिनल।


फ़ैक्स मशीन



फ़ैक्स मशीन का उपयोग टेलीफ़ोन लाइन पर तस्वीरों को भेजने और प्राप्त करने के लिये होता है। आज, कंप्यूटर में केवल एक फ़ैक्स मॉडेम बोर्ड लगा देने से इनमें किसी फ़ैक्स मशीन की क्षमताएं आ जाती हैं।



मल्टीफ़ंक्शनल डिवाइस



सेंएम. एफ. डी वे डिवाइसें हैं जिनमें स्कैनर, प्रिंटर, फैक्स और कॉपी मशीन की क्षमतायें एक साथ होती हैं। इनमें कम लागत और कम जगह घेरने के फायदे हैं। इनके नुकसान यह है कि गुणवत्ता और कार्यप्रणाली उतनी अच्छी नहीं होती जितनी अलग-अलग डिवाइसों की होती हैं।



इंटरनेट टेलीफ़ोन




इंटरनेट टेलीफ़ोनये ध्वनि-संचार भेजने और प्राप्त करने के लिये विशिष्ट प्रकार के इनपुट और आउटपुट डिवाइस हैं। ये यूएसबी पोर्ट के ज़रिये सिस्टम यूनिट से जुड़ते हैं, और ध्वनि संचार करने के लिये पारंपरिक तरीके की अपेक्षा इंटरनेट का उपयोग करते हैं। वॉयस ओवर आईपी (वीओ आई पी) कंप्यूटर नेटवर्क पर किया जाने वाला टेलीफ़ोन कॉल का संचार है, जिसे टेलीफ़ोनी, इंटरनेट टेलीफ़ोनी, और आईपी टेलीफ़ोनी के नाम से भी जानते हैं। टेलीफ़ोनी का उपयोग करने वाली कॉल में उच्च-गति के इंटरनेट कनेक्शन और विशेष प्रकार के सॉफ़्टवेयर होती है।


कंप्यूटर टू – कंप्यूटर और हार्डवेयर की आवश्यकता



“कंप्यूटर–टू-कंप्यूटर” संचार व्यक्ति को लंबी दूरी की कॉल करने की सुविधा देता है। कॉल करने के समय दोनों ओर के लोगों के कंप्यूटर इंटरनेट से कनेक्ट होने चाहिए। इसके लिये अनेक विभिन्न प्रकार के सॉफ़्टवेयर निशुल्क उपलब्ध हैं, जैसे, गूगल का गूगल टाक और याहू का याहू मैसेन्जर।



कंप्यूटर–टू–पारंपरिक टेलीफ़ोन


“कंप्यूटर–टू–पारंपरिक टेलीफ़ोन” संचार से यूज़र को अपना कंप्यूटर इंटरनेट से जोड़कर किसी भी टेलीफ़ोन पर कॉल करने की सुविधा प्राप्त होती है। कॉल करने वाली पार्टी एक विशेष इंटरनेट फ़ोन सेवा प्रदाता (सर्विस प्रोवाइडर) को सब्सक्राइब करती है जो अपेक्षित सॉफ़्टवेयर प्रदान करता है और उसके लिये एक शुल्क लेता है। इस प्रकार की कॉल के लिये एक सुप्रसिद्ध सेवा प्रदाता स्काइप लिमिटेड की स्काइप मैसेन्जर है, जो कंप्यूटर से पारंपरिक टेलीफ़ोन पर कॉल करने के लिए बहुत कम शुल्क लेती है।

पारम्परिक टेलीफोन से पारम्परिक टेलीफोन


"पारम्परिक टेलीफोन से पारम्परिक टेलीफोन" की बातचीत में टेलीफोन की आवश्यकता नहीं होती। बात करने वाले को किसी विशेष इंटरनेट फोन सर्विस प्रदान करने वाली कम्पनी की उपभोक्ता बनना पड़ता है। फोन करने वाला फीस अदा करता है तथा उसे एक विशेष प्रकार का हार्डवेयर एडाप्टर दिया जाता है जिससे पारम्परिक फोन को इंटरनेट से जोड़ा जाता है।


टर्मिनल



टर्मिनल एक इनपुट और आउटपुट डिवाइस होता है जो आपको किसी मेन फ्रेम या अलग तरह के कम्प्यूटर से जोड़ता है। टर्मिनल तीन प्रकार के होते हैं

"डम्ब टर्मिनल"- इसे इनपुट से जोड़ा जा सकता है तथा डाटा प्राप्त किया जा सकता है परन्तु यह डाटा को खुद प्रोसेस नहीं कर सकता। इस प्रकार के टर्मिनल का प्रयोग अक्सर एयरलाइन रिजर्वेशन क्लर्क उड़ान की सूचना के लिये मेन फ्रेम कम्प्यूटर से जुड़ने के लिये करते हैं।


इंटेलिजेन्ट टर्मिनल



यह एक माइक्रोकम्प्यूटर होता है जिसमें संचार साफ्टवेयर और डिवाइस होती हैं और यह एक बड़े कम्प्यूटर या इंटरनेट से जुड़ा होता है।

नेटवर्क टर्मिनलों- यह इंटेलिजेन्ट टर्मिनल का एक कम लागत का विकल्प है। ज्यादातर नेटवर्क टर्मिनलों में हार्ड डिस्क डिवाइस नहीं होती तथा अप्लीकेशन और सिस्टम सॉफ्टवेयर के लिये ये होस्ट कम्प्यूटर पर निर्भर रहते है।


संचार उपकरण



संचार उपकरणों के माध्यम से, एक कंप्यूटर इंटरनेट का उपयोग करके दुनिया के किसी भी कंप्यूटर सिस्टम के साथ संचार कर सकता है। संचार के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, निक-एडॉप्टर्स, राउटर, हब, स्विच, गेटवे, मॉडेम और नेटवर्किंग की केबल। संचार का सर्वाधिक प्रचलित उपकरण है, मॉडेम जो मॉड्यूलेटर-डीमॉड्यूलेटर का संक्षिप्त रूप है। यह टेलीफ़ोन के संचार को उस रूप में संशोधित कर देता है, जिसे एक कंप्यूटर के द्वारा प्रोसेस किया जा सकता है। मॉडेम कंप्यूटर के आउटपुट को उस रूप में संशोधित करता है, जिसे स्टैंडर्ड टेलीफ़ोन लाइनों पर प्रेषित किया जा सकता है।


मॉडेम के प्रकार



चार प्रकार के मॉडेम का उपयोग सामान्यतः होता है


  1. टेलीफ़ोन मॉडेम – इसका उपयोग कंप्यूटर को सीधे टेलीफ़ोन लाइन से जोड़ने के लिये होता है
  2. डीएसएल (डिजिटल सब्सक्राइबर) मॉडेम – यह स्टैंडर्ड टेलीफ़ोन लाइन का उपयोग करके सीधे आपकी फ़ोन कंपनी के ऑफ़िस में तेज़ रफ़्तार का कनेक्शन स्थापित करता है।
  3. टेलीफ़ोन मॉडेम – यह आपके टेलीविज़न के सामान ही कोएक्सियल केबल का उपयोग करता है।
  4. वायरलेस मॉडेम – यह एक छोटा प्लग-इन यूएसबी या एक्सप्रेस कार्ड उपकरण होता है, जो तेजत रफ़्तार की वायरलेस कनेक्टिविटी प्रदान करता है।



डेस्कटॉप सिस्टम यूनिट

माइक्रोकंप्यूटर के लिए, सिस्टम यूनिट के चार मूल प्रकार हैं
1.“डेस्कटॉप सिस्टम यूनिट” में सिस्टम के इलेक्ट्रॉनिक भाग एवं सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस होते हैं। इनपुट एवं आउटपुट डिवाइस जैसे माउस, कीबोर्ड तथा मॉनीटर सिस्टम यूनिट के बाहर स्थित रहते हैं।

नोटबुक सिस्टम यूनिट
2. “नोटबुक सिस्टम यूनिट” को “लैपटॉप” भी कहते हैं। यह पोर्टेबल एवं आकार में छोटा होता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक भाग, कुछ सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस एवं इनपुट डिवाइस, जैसे कीबोर्ड तथा प्वॉइंटिंग डिवाटैबलेट इस होते हैं। इसका मॉनीटर अलग होता है तथा सिस्टम यूनिट से हिंज द्वारा जुड़ा रहता है।


टैबलेट पीसी सिस्टम यूनिट 3


“टैबलेट पीसी सिस्टम यूनिट” नोटबुक सिस्टम यूनिट के समान होता है। स्टाइलस जैसे पेन के समान उपकरण की मदद से इसमें इनपुट किया जाता है। मूल रूप से दो प्रकार के टेबलेट पीसी होते हैं। एक लैपटॉप की तरह, जिसमें मॉनीटर जुड़ा होता है, जो चूल पर घूमकर अपने कीबोर्ड को मोड़ लेता है। दूसरे प्रकार में सिस्टम यूनिट से मॉनीटर जुड़ा होता है और इसमें कीबोर्ड सम्मिलित नहीं होता है।

हैंडहेल्ड कंप्यूटर सिस्टम यूनिट

4. “हैंडहेल्ड कंप्यूटर सिस्टम यूनिट” आकार में सबसे छोटी होती हैं, और हाथों की हथेली में समा सकती हैं। इनमें सिस्टम बोर्ड, माइक्रोप्रोसेसर और मेमोरी सहित पूरा कंप्यूटर सिस्टम शामिल होता है। इनमें टच इनपुट के साथ एक डिस्प्ले स्क्रीन और एक छोटा-सा कीबोर्ड भी हो सकते हैं। “स्मार्टफ़ोन” और “पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (पीडीए)” सर्वाधिक प्रचलित हैंडहेल्ड कंप्यूटर हैं। ये उस स्थान में उपयोगी होते हैं, जहाँ लैपटॉप या कंप्यूटर ले जा सकना व्यावहारिक न हो।


मदरबोर्ड



मदरबोर्ड, जिसे सिस्टम बोर्ड भी कहते हैं, पूरे कंप्यूटर सिस्टम के लिए संचार को नियंत्रित करता है। इसमें कंप्यूटर के लिये आवश्यक स्टैंडर्ड सर्किट होते हैं, और इनपुट एवं आउटपुट उपकरणों से जोड़ने के लिये इनमें स्लॉट होते हैं। सिस्टम यूनिट का प्रत्येक घटक सिस्टम बोर्ड से जुड़ता है। विभिन्न घटकों को एक-दूसरे के साथ संचार करने के लिये यह एक डेटा-मार्ग की तरह कार्य करता है। बोर्ड, माउस और मॉनीटर जैसे बाहरी उपकरण भी सिस्टम बोर्ड का उपयोग करके सिस्टम यूनिट के साथ संचार करते हैं।

डेस्कटॉप कंप्यूटर में, मदरबोर्ड सिस्टम यूनिट के अंदर सबसे नीचे की ओर स्थित होता है। यह एक बड़ा, चिपटा, सर्किट बोर्ड होता है, जो सॉकेट, स्लॉट और बस लाइन जैसे विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक घटकों से ढंका होता है।


सॉकेट



“सॉकेट” छोटे विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भागों के लिए कनेक्शन प्वॉइंट प्रदान करता है जिनको “चिप” कहते हैं। चिप एक पतले सर्किट बोर्ड पर होता है, यह आपकी उंगली की नोंक से पतला होता है, यह बालू के वर्ग की तरह के पदार्थ पर जड़े होते हैं जिनको सिलिकॉन कहा जाता है। चिप विभिन्न प्रकार के होते हैं जैसे माइक्रोप्रोसेसर एवं मेमोरी चिप। चिप “कैरियर पैकेज” पर स्थित होते हैं और सिस्टम बोर्ड से जुड़े होते हैं। सिलिकॉन चिप को “सेमीकंडक्टर” या “इंटिग्रेट सर्किट” के नाम से भी जाना जाता है।


स्लॉट



“स्लॉट” विशिष्ट कार्ड या सर्किट बोर्ड के लिए कनेक्शन प्वॉइंट प्रदान करता है जो कंप्यूटर सिस्टम की क्षमता का विस्तार कर सकता है। उदाहरण के लिए, इंटरनेट से जुड़ने के लिए मॉडम कार्ड को सिस्टम बोर्ड पर स्लॉट में प्लग किया जा सकता है।


बस लाइन



“बस लाइन” जोड़ने वाली लाइन होती है जो विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक भागों के बीच संचार के लिए रास्ता प्रदान करता है। ये या तो सिस्टम बोर्ड पर स्थित होती हैं या उससे जुड़ी रहती हैं।


सेन्ट्रल प्रौसेसिंग यूनिट(सी.पी.यू)



सी.पी.यू. या "माइक्रोप्रौसेसर" कंप्यूटर का मस्तिष्क होता है,जो सिस्टम यूनिट के अन्दर सुव्यवस्थित रूप से लगा होता है। यह आँकड़ों के क्रियान्वयन, संकलन एवं सूचनाओं को पुनः प्राप्त (रिट्रीविंग) करने का कार्यभार सम्हालता है। लगभग सभी निर्देश, सूचनाएँ तथा कार्य, कंप्यूटर के माइक्रोप्रौसेसर से होकर गुज़रते है।


प्राइमरी स्टोरेज डिवाइस



स्टोरेज डिवाइस दो प्रकार के होते है- प्राइमरी स्टोरेज तथा सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस। डाटा मे प्रोसेस करने के पहले या प्रोग्रात को चलाने के पहले, इसको RAM में होना आवश्यक है। इसी करण से, RAM को प्राइमरी स्टोरेज कहा जाता है। यह एक परिवर्तनशील स्टोरेज डिवाइस है यानि कि जब कम्प्यूटर को बंद करते है तो RAM में स्टोर डाटा उड़ जाता है।


सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस



रैम के विपरीत, सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस कंप्यूटर के बंद होने के बाद भी डेटा को स्टोर किए रहती है। हार्ड डिस्क, ऑप्टिकल डिस्क, फ्लॉपी डिस्क एवं पेन ड्राइव कुछ सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस हैं। हार्ड डिस्क स्थाई रूप से कंप्यूटर के अंदर स्थित रहते हैं। ऑप्टिकल डिस्क, फ़्लॉपी डिस्क एवं पेन ड्राइव पोर्टेबल स्टोरेज डिवाइस हैं जिनका उपयोग आप एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डेटा को स्थानांतरित करने के लिए कर सकते हैं।


सेकेंडरी स्टोरेज की विशेषतायें




  • सेकेंडरी स्टोरेज- सेकेंडरी स्टोरेज स्थाई स्टोरेज प्रदान करता है।
  • सेकेंडरी स्टोरेज की कुछ खास विशेषतायें निम्न है
  • "मीडिया"- ये वास्तविक भौतिक सामग्री है जिसमें डाटा और प्रोग्राम स्टोर रहते हैं।
  • "कैपिसिटी (क्षमता)"- ये मापता है कि एक विशेष स्टोरेज माध्यम कितना स्टोरेज कर सकता है।


हार्ड डिस्क



आमतौर पर हार्ड डिस्क का उपयोग प्रोग्राम या बड़ी डेटा फ़ाइल को स्टोर करने के लिए किया जाता है। ये बहुत संवेदनशील उपकरण होते हैं। उनके रीड राइट हेड हवा की बहुत पतली परत पर टिके होते हैं। "हेड क्रैश" हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त होने की एक विशेष स्थिति होती है। यह तब होता है जब रीड राइट हेड उसकी सतह या सतह पर किसी कण के सम्पर्क में आ जाता है। धुएँ के कण, उँगली के निशान, धूल या मानव के बाल "हेड क्रैश" कर सकते हैं। हेड क्रैश के करण डिस्क की सतह पर ख़रोंच आ जाती है और डेटा आंशिक या पूर्ण रूप से नष्ट हो जाते हैं।



"हार्ड डिस्क के प्रकार



तीन प्रकार के हार्ड डिस्क निम्नलिखित है-


  1. "इंटरनल (आंतरिक) हार्ड डिस्क" सिस्टम यूनिट के अंदर स्थित होती है। इसका प्रयोग प्रोग्रामों तथा बड़ी डाटा फ़ाइलों को स्टोर करने में किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम तथा प्रमुख एप्लीकेशन माइक्रोकम्प्यूटर के आंतरिक हार्ड डिस्क में स्टोर रहते हैं। ये स्टोर डाटा तक बहुत जल्दी पहुँचाते है।
  2. "हार्ड डिस्क कार्टिरेजस"- इनका प्रयोग आंतरिक हार्ड डिस्क की क्षमता को बढ़ाने के लिये किया जाता है। इन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है तथा संवदनशीन सूचनाओं की रक्षा करने में ये विशेष रूप से उपयोगी हैं।
  3. "हार्ड डिस्क पैक"- ये अलग किये जा सकने वाले स्टोरेज डिवाइस हैं जिनका उपयोग बहुत बड़ी मात्रा में सूचनाओं को स्टोर करने में किया जाता है। जो माइक्रोकम्प्यूटर इंटरनेट, मिनी कम्प्यूटरों या मेन फ्रेम से जुड़ं होते हैं, वे संचार लाइनों के द्वारा अक्सर एक्सटर्नल (बाहरी) हार्ड डिस्क पैक से जुड़े होते हैं।


फ्लॉपी डिस्क



फ्लॉपी डिस्क साथ ले जाया जा सकने वाली या अलग की जा सकने वाली स्टोरेज मी़डिया है, जिसका उपयोग छोटी फाइलों को स्टोर करने या भेजने में किया जाता है। पारम्परिक फ्लॉपी डिस्क 1.44 MB 2HD साढ़े तीन इंच डिस्क होती है। 2HD का अर्थ है दोनों तरफ से कार्य करने वाला मे तात्पर्य है कि डाटा मे डिस्क के दोनों तरफ स्टोर किया जा सकता है। धनत्व (Density) का मतलब है कि बिटस आपस में एक-दूसरे में कितनी अधिक नजदीकी से जुड़ सकते है।


हाई कैपिसिटी डिस्क



हाई कैपिसिटी डिस्क (उच्च क्षमता की डिस्क) को "फ्लॉपी की तरह, इनका व्यास साढ़े तीन इंच होता है, परन्तु ये अधिक सूचनाओं को स्टोर करने में सक्षम हैं, अधिक मोटाई होती है और इन्हें विशेष डिस्क ड्राइवों की आवश्यकता होती है। सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली हाई कैपिसिटी डिस्क लोमेंगा द्वारा निर्मित जिप डिस्क है। इन डिस्कों की क्षमता 100 MB, 250 MB या 750 MB होती है जो एक मानक फ्लॉपी डिस्क की क्षमता को 500 गुना से भी ज्यादा होती है।


ऑप्टिकल डिस्क


ऑप्टिकल डिस्क कॉम्पेक्ट, हल्के तथा लंबे समय तक चलने वाले होते हैं तथा इनकी स्टोरेज क्षमता अधिक होती हैं। ऑप्टिकल-डिस्क तकनीक में, लेस़र बीम डेटा को व्यक्त करने के लिए प्लास्टिक या मेटल के डिस्क के सतह को बदलता हैं। तीन प्रकार के ऑप्टिकल डिस्क निम्नलिखित हैं-



कॉम्पैक्ट डिस्क, डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क एवं हाई-डेफ़िनिशन डिस्क



“कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी)” सर्वाधिक प्रयोग में आने वाले ऑप्टिकल फॉरमेट में एक हैं। मूल रूप से सीडी तीन प्रकार के होते हैं- रीड ओनली, राइट वंस एवं रिराइटेबल।




“डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क (डीवीडी)”



काफी हद तक सीडी के समान होते है सिवाय कि इनमें उतनी ही जगह में ज्यादा डेटा को स्टोर किया जा सकता है। सीडी के समान डीवीडी भी मूल रूप से तीन प्रकार के होते हैं- रीड ओनली, राइट वंस एवं रिराइटेबल।


हाई-डेफ़िनिशन (हाई-डिफ) डिस्क



इनकी क्षमता डीवीडी की तुलना में कई गुणा अधिक होती है। हाई-डेफ़िनिशन वीडियो की रिकार्डिंग करने के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है, जिसके लिए स्टैन्डर्ड-डेफ़िनिशन फिल्म और संगीत को स्टोर करने के लिए आवश्यक क्षमता से चार गुणा अधिक क्षमता की आवश्यकता होती हैं। सीडी और डीवीडी की तरह, हाई-डिफ तीन प्रकार के होते है- रीड ओनली, राइट वंस और रिराइटेबल।

हाई-डिस्क फॉरमेट के प्रकार

हाई-डिस्क फॉरमेट दो प्रकार के होते है, जो निम्न है
  1. “एचडी डीवीडी” से तात्पर्य “हाई-डेफिनेशन डीवीडी” से हैं। यह फॉरमेट डीवीडी के समान होता है, किंतू इसकी क्षमता बहुत अधिक होती हैं।
  2. “ब्लू रे” डीवीडी और एचडी डीवीडी फॉरमेट से अलग तरह का फॉरमेट हैं। इन डिस्कों को बीडी के नाम से भी जाना जाता है, और इसकी क्षमता एचडी डीवीडी डिस्क से ज्यादा होती हैं।

सेकेण्डरी स्टोरेज के अन्य प्रकार


  1. फ़्लॉपी डिस्क, हार्ड डिस्क एवं ऑप्टिकल डिस्क के साथ ही, अन्य दूसरे विशिष्ट स्टोरेज़ जैसे- सॉलिड-स्टेट स्टोरेज, इंटरनेट हार्ड ड्राइव एवं मैग्नेटिक टेप होते हैं।
  2. सॉलिड-स्टेज़ स्टोरेज़- सॉलिड-स्टेट स्टोरेज़ डिवाइसों का कोई अलग किया जाने वाला भाग नहीं होता है। डेटा और सूचनाओं को इलेक्ट्रॉनिक विधि से इन डिवाइसों में उसी प्रकार से स्टोर करते है और इनसे प्राप्त करते है जिस प्रकार से पारंपरिक कंप्यूटर मेमोरी में स्टोर करते है या उससे प्राप्त करते हैं। इनमें स्टोर करना ज्यादा मंहगा पड़ता है, परंतू ये अधिक विश्वनीय है तथा इसे कम पावर की आवश्यक्ता होती है।


फ़्लैश मेमोरी कार्ड



“फ़्लैश मेमोरी कार्ड” क्रेडिट कार्ड के आकार का सॉलिड-स्टेट स्टोरेज़ डिवाइस होते है और इनका प्रयोग नोटबुक कंप्यूटरों में तथा विभिन्न प्रकार के विशेष इनपुट डिवाइसों में किया जाता हैं।
“यू.एस.बी ड्राइव”- ये संपूर्ण डिवाइस हैं जिन्हें कंप्यूटर के यू.एस.बी से सीधे जोड़ दिया जाता हैं। इनका प्रयोग कंप्यूटरों के बीच तथा विभिन्न विशेष डिवाइसों के बीच डेटा भेजने के लिए किया जाता है


इंटरनेट हार्ड ड्राइव


वेब पर विशेष सेवा साइट यूज़र को स्टोरेज़ उपलब्ध कराता हैं। यह स्टोरेज़ इंटरनेट हार्ड ड्राइव कहलाता है। कम लागत और इंटरनेट का प्रयोग कर सूचना को किसी भी जगह प्राप्त करना इसके मुख्य लाभ हैं। कुछ इंटरनेट हार्ड ड्राइव साइटों को दिए गए चित्र में दर्शाया गया हैं।


मैग्नेटिक टेप



मैग्नेटिक टेप डेटा को बैकअप करने का सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाला उपकरण हैं क्योंकि यह बहुत अधिक स्टोरेज़ क्षमता प्रदान करता हैं। डिस्क के विपरीत, जो तेजी से सूचना उपलब्ध कराते हैं, मैग्नेटिक टेप धीमी गति से क्रमवार सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं। पहले, मेनफ्रेम विशेष रूप में “मैग्नेटिक टेप रीलों” का प्रयोग करते थे। आज के समय में, “टेप कार्ट्रिजों” और “मेग्नेटिक टेप स्टीमरों” का प्रयोग मेनफ्रेम के साथ ही साथ माइक्रोकंप्यूटर में सामान्य रूप से होता है।


मास स्टोरेज़ डिवाइस


ये डिवाइस विशेष प्रकार की उच्च-क्षमता युक्त सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस हैं, जिन्हें डेटा के लिए संगठनात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अनेक बड़े संगठनों ने संगठनात्मक नेटवर्क के बीच डेटा को ठीक तरह से और सुरक्षित आदान-प्रदान करने के लिए “इंटरप्राइज़ स्टोरेज सिस्टम” नामक एक उपक्रम स्थापित किया है।

मास स्टोरेज़ डिवाइसेस जो संगठनात्मक नेटवर्क को मदद करता हैं
इस उपक्रम को मदद करने वाली कुछ मास स्टोरेज़ डिवाइसों का विवरण नीचे दिया गया है-
“फाइल सर्वर” एक बड़ी क्षमता के समर्पित कंप्यूटर होते हैं, जिसमें डेटा को तेज गति से स्टोर किया जा सकता हैं तथा प्राप्त किया जा सकता हैं।
“रेड सिस्टम” विशेष प्रकार के डिवाइस होती हैं जो नेटवर्क के मध्य घूमती फाइलों की बैकअप कॉपी तैयार कर सुरक्षा को बढ़ा देती है।
“टेप लाइब्रेरी” एक डिवाइस है जो टेपों में स्टोर डेटा को प्राप्त करने में मदद करती हैं।
“डीवीडी-रोम एवं सीडी-रोम ज्यूकबॉक्स” ऑप्टिकल डिस्क में स्टोर डेटा को स्वयं ही उपलब्ध कराता है।
“संगठनात्मक इंटरनेट स्टोरेज़” एक तेज गति का इंटरनेट कनेक्शन हैं जो एक डेडिकेटेड रिमोट ऑर्गेनाइज़ेशनल इंटरनेट ड्राइव साइट से जुड़ा होता हैं।


डिस्क ड्राइव



"माइक्रोप्रौसेसर", हार्डडिस्क और फ्लापी-डिस्क जैसे संकलन माध्यमों से सीधे पढ़ लिख नहीं सकता। "डिस्क ड्राइव" एक ऐसा उपकरण है, जो इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु विकसित किया गया है। जब डिस्क से आँकड़ो को क्रियान्वित किया जाता है, तो वह "डिस्क ड्राइव" के माध्यम से पठनीय हो जाता है। क्रियान्वयन प्रक्रिया के बाद डिस्क ड्राइव, डिस्क पर आँकड़ों को अंकित कर देता है। इस प्रकार यह पढ़ने और अंकित करने के, दोनों काम करता है। दूसरे शब्दों मे निवेश व निर्गत कार्यो का "कर्ता" है। यही कारण है कि "डिस्क ड्राइव", इनपुट और आउटपुट यंत्र के नाम से जाना जाता है।



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